5 जुलाई 2026

भारत से दुबई पैसा कैसे भेजें: LRS, USD 2.5 लाख की सीमा और 20% TCS

दुबई में अपार्टमेंट या विला ख़रीदने का सपना देखने वाले हर भारतीय निवेशक के सामने सबसे पहला व्यावहारिक सवाल कीमत का नहीं, बल्कि पैसा भारत से बाहर कैसे निकले का होता है। भारत एक पूँजी-नियंत्रित (capital-controlled) देश है — आप जितना चाहें उतना पैसा जब चाहें विदेश नहीं भेज सकते। RBI ने एक सालाना सीमा तय कर रखी है, और उस सीमा को समझे बिना दुबई की डील प्लान करना अधूरा है। यही एक वजह है जो एक भारतीय ख़रीदार को यूरोपीय या खाड़ी के ख़रीदार से अलग करती है।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है — यह टैक्स या कानूनी सलाह नहीं है। पूँजी-नियंत्रण और टैक्स के नियम हर वित्त वर्ष में बदल सकते हैं; नीचे दिए सभी आँकड़े 2026 की स्थिति के अनुसार हैं। पैसा भेजने या डील साइन करने से पहले भारत में किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और अपने AD बैंक से पुष्टि ज़रूर कर लें। हम यहाँ किसी टैक्स-परिणाम का वादा नहीं कर रहे — सिर्फ़ ढाँचा समझा रहे हैं ताकि आप सही सवाल पूछ सकें।

LRS क्या है और USD 2.5 लाख की सीमा असल में कैसे काम करती है?

RBI की Liberalised Remittance Scheme (LRS) ही वह रास्ता है जिससे एक सामान्य भारतीय निवासी वैध रूप से विदेश पैसा भेजता है। इसके तहत हर व्यक्ति प्रति वित्त वर्ष (अप्रैल–मार्च) अधिकतम USD 2,50,000 ही भेज सकता है। यह एक सख़्त, प्रति-व्यक्ति सीमा है और यह नाबालिग बच्चों पर भी लागू होती है — यानी परिवार के हर सदस्य का अपना अलग कोटा है।

दुबई में प्रॉपर्टी ख़रीदना LRS का एक अनुमत उद्देश्य है, जिसका purpose code S0005 है — “विदेशी अचल संपत्ति की खरीद”। दिक़्क़त तब आती है जब प्रॉपर्टी की कीमत USD 2.5 लाख (मोटे तौर पर AED 9 लाख से ऊपर) से ज़्यादा हो। ऐसे में अधिकांश ख़रीदार दो में से एक रास्ता अपनाते हैं:

  • परिवार में पूलिंग: पति-पत्नी और वयस्क परिवार सदस्य अपने-अपने USD 2.5 लाख कोटे को मिलाकर एक बड़ी राशि जुटाते हैं। ऐसे में सह-स्वामित्व (co-ownership) प्रॉपर्टी टाइटल पर दर्ज होना चाहिए।
  • वर्षों में फैलाना: ऑफ-प्लान प्रॉपर्टी की किस्तें अक्सर 3–4 साल में फैली होती हैं, इसलिए आप 31 मार्च के बाद अगले वित्त वर्ष का नया कोटा इस्तेमाल कर सकते हैं। यही वजह है कि ऑफ-प्लान भुगतान योजना LRS सीमा के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है — इस पर अधिक ऑफ-प्लान ख़रीदने की गाइड में पढ़ें।

यहाँ राजनीतिक या युद्ध-संबंधी कोई पाबंदी नहीं है — भारत-से-UAE प्रेषण पर कोई प्रतिबंध नहीं। असली बाधा सिर्फ़ सालाना LRS सीमा और दस्तावेज़ीकरण है।

20% TCS का मतलब क्या है — क्या यह पैसा डूब जाता है?

यह सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है। एक वित्त वर्ष में निवेश/रियल-एस्टेट उद्देश्य से 10 लाख रुपये से ऊपर के LRS प्रेषण पर बैंक 20% TCS (Tax Collected at Source) वसूलता है (यह सीमा FY2025-26 से 7 लाख से बढ़ाकर 10 लाख की गई)।

लेकिन ज़रूरी बात यह है: TCS कोई टैक्स-लागत नहीं है — यह पूरी तरह आपके आयकर के विरुद्ध क्रेडिट या रिफंड योग्य है। यानी अगर बैंक ने आपसे 20% काटा, तो आप उसे ITR भरते समय अपनी टैक्स देनदारी में समायोजित कर लेते हैं, या रिफंड पा लेते हैं। इसका असर सिर्फ़ कैश-फ़्लो पर है — यह पैसा अस्थायी रूप से सरकार के पास रहता है, स्थायी रूप से नहीं जाता। फिर भी योजना बनाते समय इसे ध्यान में रखें, क्योंकि बड़ी डील में यह लाखों रुपये का अस्थायी ब्लॉक हो सकता है।

पैसा भेजने की प्रक्रिया कैसी होती है?

प्रेषण किसी भी बैंक से नहीं, बल्कि एक AD (Authorised Dealer) बैंक के माध्यम से होता है। मुख्य चरण:

  1. PAN और Form A2 घोषणा: हर LRS प्रेषण के लिए Form A2 भरना होता है जिसमें उद्देश्य कोड (S0005) घोषित किया जाता है।
  2. धन का वैध स्रोत: पैसा आपकी अपनी वैध आय से आना चाहिए — वेतन, व्यवसाय, या किसी संपत्ति की बिक्री। बैंक इसका प्रमाण माँग सकता है।
  3. दस्तावेज़: आमतौर पर बिक्री-अनुबंध (SPA), डेवलपर का इनवॉइस और लाभार्थी (एस्क्रो) खाते का विवरण।

पैसा सीधे विक्रेता की जेब में नहीं, बल्कि दुबई के RERA-नियंत्रित एस्क्रो खाते में जाता है — यही ख़रीदार की सुरक्षा है। एस्क्रो कैसे काम करता है, यह हमारी एस्क्रो और RERA सुरक्षा गाइड में विस्तार से है। ध्यान रहे, LRS का उपयोग कुछ निषिद्ध उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता, और स्रोत हमेशा आपकी अपनी दस्तावेज़ी आय होना चाहिए।

निवासी बनाम NRI — आपकी स्थिति सब कुछ बदल देती है

भारत निवास के आधार पर (residence basis) टैक्स लगाता है, क्षेत्र के आधार पर नहीं। इसका मतलब:

स्थितिLRS सीमा लागू?दुबई आय/लाभ पर भारत में टैक्स?
ROR (सामान्य निवासी)हाँ — USD 2.5 लाख/वर्षहाँ, वैश्विक आय पर slab दर से
RNORहाँ (जब तक निवासी)आम तौर पर विदेशी आय पर छूट
NRI (असली)नहीं — LRS हटती हैकेवल भारत-स्रोत आय पर

निवास स्थिति भारत में बिताए दिनों से तय होती है — मुख्यतः 182-दिन का परीक्षण, साथ ही भारतीय नागरिकों/PIO के लिए एक 120-दिन का नियम (जब भारतीय आय 15 लाख रुपये से ऊपर हो, तब वे RNOR बन सकते हैं)। एक बार आप असली NRI बन जाएँ (यानी वाक़ई UAE में रहने लगें), तो LRS सीमा लागू नहीं होती और आप NRE खाते या विदेशी कमाई स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकते हैं। यानी टाइमिंग मायने रखती है — आपकी residency दोनों चीज़ें बदल देती है: टैक्स और पैसा भेजने की व्यवस्था।

एक अहम चेतावनी: UAE Golden Visa या रेज़िडेंस परमिट अपने आप आपकी भारतीय टैक्स-रेज़िडेंसी ख़त्म नहीं करता। केवल आपके भारत में बिताए दिन ही यह तय करते हैं। वीज़ा और प्रॉपर्टी-थ्रेशहोल्ड पर विस्तार से गोल्डन वीज़ा गाइड में पढ़ें।

दुबई आय और बिक्री-लाभ पर भारत में टैक्स कैसे लगेगा?

अगर आप ROR हैं, तो दुबई की किराया आय भारत में ITR में घोषित करनी होगी — विदेशी आय Schedule FSI में और विदेशी संपत्ति Schedule FA में। इस पर slab दर से टैक्स लगता है। चूँकि UAE व्यक्तिगत आयकर नहीं लेता, इसलिए क्रेडिट करने योग्य विदेशी टैक्स लगभग शून्य होता है — असल देनदारी भारत में ही आती है।

दुबई प्रॉपर्टी बेचने पर पूँजीगत लाभ भी निवासियों के लिए भारत में टैक्स योग्य है। अचल संपत्ति पर दीर्घकालिक लाभ मोटे तौर पर लगभग 12.5% (2024 के बाद की व्यवस्था, indexation काफ़ी हद तक हटा) और अल्पकालिक लाभ slab दर पर लगता है — पर बिक्री के समय सटीक आँकड़े CA से पुष्टि करें।

India–UAE DTAA (1992 में हस्ताक्षरित, 1993 में अधिसूचित) यहाँ भूमिका निभाता है। इसके Article 13 के अनुसार, अचल संपत्ति पर लाभ वहाँ टैक्स योग्य होता है जहाँ संपत्ति स्थित है (UAE)। भारत निवास-देश के रूप में वैश्विक आय पर टैक्स लगाता है पर UAE-टैक्स का क्रेडिट देता है — जो व्यक्तियों पर शून्य होने के कारण, प्रभावी देनदारी भारत में ही रहती है। भारतीय ख़रीदार के टैक्स-पहलुओं पर हमारी समर्पित भारतीय ख़रीदारों के लिए टैक्स गाइड ज़रूर देखें।

एक गंभीर चेतावनी: विदेशी संपत्ति की घोषणा न करना 10 लाख रुपये तक जुर्माना और Black Money Act के परिणाम (30% टैक्स प्लस 3 गुना तक जुर्माना) ला सकता है। पारदर्शिता ही सुरक्षा है।

विरासत और मुद्रा — दो चीज़ें जो लोग भूल जाते हैं

विरासत: UAE में विदेशियों के लिए forced-heirship अनिवार्य नहीं है, बशर्ते वे अपने गृह-देश के कानून का विकल्प चुनें या DIFC/UAE वसीयत बनाएँ। बिना वसीयत के, UAE संपत्ति पर Sharia की डिफ़ॉल्ट व्यवस्था लागू हो सकती है। इसलिए दुबई प्रॉपर्टी की विरासत अपने हिसाब से तय करने के लिए एक पंजीकृत DIFC वसीयत बनवाना समझदारी है।

मुद्रा: रुपया संरचनात्मक रूप से डॉलर के मुक़ाबले गिरता रहा है, और AED डॉलर से पेग्ड है। इसलिए दुबई प्रॉपर्टी एक तरह से रुपये की कमज़ोरी के विरुद्ध हेज का भी काम करती है — आपकी संपत्ति एक मज़बूत मुद्रा में है। पर याद रखें, बिक्री की रकम वापस भारत लाना भी रिपोर्टिंग के अधीन है।

व्यावहारिक चेकलिस्ट

  • अपनी residency स्थिति तय करें (ROR / RNOR / NRI) — यह सब कुछ बदलती है
  • परिवार में उपलब्ध कुल LRS कोटा गिनें (हर सदस्य × USD 2.5 लाख)
  • बड़ी डील के लिए पूलिंग या वर्षों में फैलाव की योजना बनाएँ
  • AD बैंक से Form A2, PAN और आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची पहले ले लें
  • धन के वैध स्रोत के प्रमाण तैयार रखें
  • 20% TCS के कैश-फ़्लो असर को बजट में शामिल करें (यह रिफंडेबल है)
  • Schedule FA/FSI घोषणा के लिए CA नियुक्त करें
  • दुबई संपत्ति के लिए DIFC वसीयत बनवाएँ
  • सभी आँकड़ों की 2026 की स्थिति के लिए CA और बैंक से पुष्टि लें

Palmera भारतीय ख़रीदारों की कैसे मदद करता है

Palmera (RERA ORN 40780) दुबई की एक लाइसेंस-प्राप्त ब्रोकरेज है और हम नियमित रूप से भारत के ख़रीदारों के साथ काम करते हैं — इसलिए हम LRS-अनुकूल भुगतान योजनाओं की व्यावहारिकता समझते हैं। हम आपको ऐसी ऑफ-प्लान परियोजनाएँ दिखाते हैं जिनकी किस्तें वित्त वर्षों में स्वाभाविक रूप से फैलती हैं, ताकि आप USD 2.5 लाख की सीमा में सहजता से रहें। एक विदेशी के तौर पर दुबई में ख़रीदने की पूरी प्रक्रिया हमारी विदेशी ख़रीदार गाइड में है, और आप हमारी उपलब्ध प्रॉपर्टीज़ ब्राउज़ कर सकते हैं।

हम आपके भारत के CA और बैंक के साथ समन्वय करते हैं ताकि SPA, इनवॉइस और एस्क्रो-विवरण उसी रूप में मिलें जैसे Form A2 प्रक्रिया माँगती है। ध्यान रहे — हम टैक्स या कानूनी सलाहकार नहीं हैं; भारत-पक्ष की पुष्टि हमेशा आपके अपने योग्य पेशेवर से होनी चाहिए। हमारा काम है दुबई-पक्ष को साफ़, दस्तावेज़ी और सुरक्षित बनाना, ताकि आपका पैसा सही रास्ते से, सही जगह पहुँचे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक भारतीय निवासी एक साल में दुबई प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम कितना पैसा भेज सकता है?

RBI की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत हर भारतीय निवासी प्रति वित्त वर्ष (अप्रैल–मार्च) अधिकतम USD 2,50,000 ही विदेश भेज सकता है। यह सख़्त सीमा प्रति व्यक्ति है और नाबालिग बच्चों पर भी लागू होती है। दुबई में महँगी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अधिकांश खरीदार यह सीमा पति-पत्नी और वयस्क परिवार सदस्यों में बाँटते हैं, या खरीद को दो वित्त वर्षों में फैलाते हैं। ये आँकड़े 2026 के अनुसार हैं और नियम बदल सकते हैं, इसलिए भेजने से पहले अपने AD बैंक और CA से पुष्टि करें।

20% TCS क्या है — क्या यह अतिरिक्त टैक्स है जो डूब जाता है?

नहीं। TCS (Tax Collected at Source) कोई अलग खर्च नहीं है। एक वित्त वर्ष में निवेश/रियल-एस्टेट उद्देश्य से 10 लाख रुपये से ऊपर के LRS प्रेषण पर बैंक 20% TCS वसूलता है, लेकिन यह राशि आपके आयकर के विरुद्ध पूरी तरह क्रेडिट या रिफंड योग्य है। यानी यह एक अस्थायी कैश-फ़्लो असर है, स्थायी लागत नहीं — ITR भरते समय आप इसे समायोजित कर लेते हैं। सीमा FY2025-26 से 7 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई। सटीक स्थिति के लिए अपने CA से पुष्टि लें।

क्या दुबई प्रॉपर्टी से हुई किराया आय पर मुझे भारत में टैक्स देना होगा?

अगर आप भारत में Resident & Ordinarily Resident (ROR) हैं, तो भारत आपकी वैश्विक आय पर टैक्स लगाता है — इसमें दुबई की किराया आय और बिक्री पर पूँजीगत लाभ भी शामिल हैं। यह ITR में Schedule FSI (विदेशी आय) और Schedule FA (विदेशी संपत्ति) में घोषित करनी होती है और slab दर पर टैक्स लगता है। UAE व्यक्तिगत आयकर नहीं लेता, इसलिए क्रेडिट करने योग्य विदेशी टैक्स लगभग शून्य होता है। विदेशी संपत्ति न बताने पर भारी जुर्माना और Black Money Act के परिणाम हो सकते हैं। NRI बनने पर स्थिति बदल जाती है।

Golden Visa लेने से क्या मेरी भारतीय टैक्स-रेज़िडेंसी ख़त्म हो जाती है?

नहीं। UAE Golden Visa या रेज़िडेंस परमिट अपने आप आपकी भारतीय टैक्स-निवास स्थिति समाप्त नहीं करता। भारत में निवास केवल आपके भारत में बिताए दिनों से तय होता है — मुख्यतः 182-दिन का परीक्षण, साथ ही कुछ मामलों में 120-दिन का नियम। जब तक आप कागज़ों पर भारतीय निवासी हैं, आप दुबई प्रॉपर्टी की वैश्विक आय पर उत्तरदायी रहते हैं। असली NRI बनने (UAE में रहने) पर ही LRS सीमा हटती है और आप NRE/विदेशी कमाई स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकते हैं।

पैसा भेजने के लिए किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

प्रेषण एक AD (Authorised Dealer) बैंक के माध्यम से Form A2 घोषणा और PAN पर होता है। धन का स्रोत वैध और दस्तावेज़ी होना चाहिए — जैसे वेतन, व्यवसाय आय या बिक्री की रसीद। बैंक आमतौर पर बिक्री-अनुबंध (SPA), डेवलपर का इनवॉइस और उद्देश्य का प्रमाण माँगता है; उद्देश्य कोड S0005 (विदेशी अचल संपत्ति की खरीद) प्रयोग होता है। LRS का उपयोग कुछ निषिद्ध उद्देश्यों के लिए नहीं हो सकता। सटीक चेकलिस्ट बैंक-दर-बैंक भिन्न होती है, इसलिए पहले अपने बैंक से पुष्टि करें।

स्रोत · अंतिम अद्यतन 5 जुलाई 2026

  • RBI — Liberalised Remittance Scheme (LRS) master direction, USD 250,000/FY cap, purpose code S0005 · 2026
  • India Income-tax Act — TCS on foreign remittances (20% above Rs 10 lakh, FY2025-26 threshold), Schedule FA/FSI disclosure · 2026
  • India–UAE Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA), Article 13 (capital gains on immovable property) · 2026
  • UAE / Dubai Land Department — freehold ownership, DLD 4% transfer fee, property investor & Golden Visa thresholds, AED–USD peg · 2026
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